ब्रिटेन की ग्रीन पार्टी ने ‘जायोनिज्म को नस्लवाद’ घोषित किया: ब्राइटन सम्मेलन के प्रस्ताव, आंतरिक मतभेद और कूटनीतिक टकराव की पड़ताल
ब्रिटेन के तटीय शहर ब्राइटन में 4 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुए ‘ग्रीन पार्टी ऑफ इंग्लैंड एंड वेल्स’ के वार्षिक सम्मेलन ने यूरोपीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के सदस्यों ने बहुमत से एक प्रस्ताव पारित कर आधिकारिक तौर पर जायोनिज्म (यहूदी राष्ट्रवाद) को नस्लवाद का एक रूप घोषित कर दिया है। इस कदम के साथ ही ग्रीन पार्टी यूरोप की पहली ऐसी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी बन गई है, जिसने आधिकारिक नीति के तौर पर खुद को ‘एंटी-जायोनिस्ट’ घोषित किया है। रविवार को ब्राइटन सेंटर के बाहर जहां इजराइल समर्थक प्रदर्शनकारी नीले-सफेद इजराइली झंडों के साथ प्रदर्शन करते दिखे, वहीं सभागार के भीतर फलस्तीनी झंडों और हरे वोटिंग कार्ड्स के बीच घंटों तक बेहद तनावपूर्ण बहस चली।
प्रस्ताव ए-105 का मूल पाठ और जायोनिज्म की नई परिभाषा
ब्राइटन सम्मेलन में पारित इस प्रस्ताव (मोशन ए-105) में जायोनिज्म को एक ‘एथनो-नेशनलिस्ट राजनीतिक परियोजना’ यानी ऐसी जातीय-राष्ट्रवादी विचारधारा के रूप में परिभाषित किया गया है, जो अन्य समूहों की कीमत पर एक विशेष जातीय समूह को प्राथमिकता देती है। प्रस्ताव के आधिकारिक मसौदे में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी जायोनिज्म को किसी भी अन्य प्रकार के नस्लवाद की तरह ही देखेगी, और जायोनिज्म के विरोध को यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज्म) के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
इस नीतिगत दस्तावेज में पांच प्रमुख राजनीतिक बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- ऐतिहासिक फलस्तीन के संपूर्ण क्षेत्र में एक ‘एकल लोकतांत्रिक राज्य’ की स्थापना, जिसकी राजधानी येरुशलम हो और जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।
- फलस्तीनी मुक्ति और विस्थापित शरणार्थियों के अपने वतन ‘लौटने के अधिकार’ (राइट ऑफ रिटर्न) का समर्थन।
- इजराइल के खिलाफ ‘बॉयकॉट, डिवेस्टमेंट एंड सेंक्शंस’ (बीडीएस) आंदोलन को आधिकारिक समर्थन।
- इजराइल पर पूर्ण और दोतरफा हथियार प्रतिबंध।
- गाजा तथा वेस्ट बैंक में इजराइली सैन्य कार्रवाई और अवैध कब्जे का कड़ा विरोध।
ऐतिहासिक दृष्टि से यह प्रस्ताव वर्ष 1975 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3379 की याद दिलाता है, जिसमें जायोनिज्म को नस्लवाद बताया गया था, हालांकि 1991 में मैड्रिड शांति सम्मेलन से पहले उसे वापस ले लिया गया था।
मतदान का गणित और प्रत्यक्ष लोकतंत्र की कार्यप्रणाली
आधिकारिक मतदान के आंकड़ों के अनुसार, प्रस्ताव के पक्ष में 1,022 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 813 ने इसके विरोध में वोट दिया। कुल 1,835 मतों में से केवल 209 वोटों का अंतर दर्शाता है कि पार्टी के भीतर लगभग 44 प्रतिशत मतदान करने वाले प्रतिनिधि इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थे।
ब्रिटेन की अन्य प्रमुख पार्टियों के विपरीत, ग्रीन पार्टी अपनी नीतियां तय करने के लिए ‘प्रत्यक्ष लोकतंत्र’ के मॉडल पर चलती है। यहां संसदीय नेतृत्व नीतियां नहीं थोपता, बल्कि सम्मेलन में शामिल होने वाले आम सदस्य अपने वोट से पार्टी का रुख तय करते हैं। सम्मेलन से पहले फलस्तीन समर्थक समूहों ने विशेष अभियान चलाकर लोगों को ग्रीन पार्टी से जुड़ने और ब्राइटन पहुंचकर इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिए संगठित किया था।
सांसदों के समर्थन का सच: नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच दरार
शुरुआती चर्चाओं में यह दावा सामने आया कि पार्टी के कुछ सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। आधिकारिक रिकॉर्ड पुष्टि करते हैं कि संसद में मौजूद ग्रीन पार्टी के सभी पांचों सांसदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसे पारित होने से रोकने का प्रयास किया।
केवल सदस्यों के लिए आयोजित बहस के दौरान, संसद में ग्रीन पार्टी की नेता एली चौन्स और पार्टी की पहली सांसद रहीं पूर्व नेता कैरोलिन लुकास ने प्रस्ताव के खिलाफ मुखर दलीलें दीं। एली चौन्स ने सभी सांसदों की ओर से बोलते हुए कहा कि जायोनिज्म एक विवादित अवधारणा है जिसकी कोई एक परिभाषा नहीं है, और किसी समुदाय की व्यक्तिगत पहचान को सीधे नस्लवाद घोषित करना ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देगा। पूर्व सह-नेता कार्ला डेनियर ने भी इसे यहूदी समुदाय को अलग-थलग करने वाला कदम बताते हुए खारिज करने की अपील की थी। मतदान के बाद पांचों सांसदों ने संयुक्त बयान जारी कर इस प्रस्ताव से दूरी बना ली और दोहराया कि फलस्तीनियों तथा यहूदियों के अधिकारों में कोई टकराव नहीं है।
जैक पोलान्स्की की अनुपस्थिति और होल्बॉर्न उपचुनाव का समीकरण
इस घटनाक्रम में ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलान्स्की की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में रही, जो स्वयं यहूदी हैं। आधिकारिक तौर पर यह सत्यापित है कि पोलान्स्की ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया। सम्मेलन की तस्वीरों में वे मंच पर हाथ उठाकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते दिखे, लेकिन वोटिंग से पहले ही वे ब्राइटन छोड़कर लंदन रवाना हो गए।
उनके जल्दी निकलने का कारण लंदन की ‘होल्बॉर्न एंड सेंट पैनक्रास’ संसदीय सीट पर होने वाला उपचुनाव है, जो प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की पुरानी सीट रही है और जहां से पोलान्स्की खुद उम्मीदवार हैं। सितंबर में पोलान्स्की ने उपचुनाव के मद्देनजर सम्मेलन को स्थगित करने का अनुरोध भी किया था, जिसे पार्टी ने अस्वीकार कर दिया था। मतदान से एक दिन पहले बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा था कि प्रस्ताव में फलस्तीनियों के विस्थापन और नरसंहार को जिस रूप में परिभाषित किया गया है, वह स्पष्ट रूप से नस्लवाद है, हालांकि वे स्वयं दोनों समुदायों के समान अधिकारों वाले संशोधन के पक्षधर थे।
इजराइल की तीखी प्रतिक्रिया और पोलान्स्की के प्रवेश पर प्रतिबंध
प्रस्ताव पारित होते ही इसने एक गंभीर कूटनीतिक विवाद का रूप ले लिया। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस फैसले को “स्पष्ट एंटीसेमिटिक” और “ब्रिटेन के इतिहास पर एक कलंक” बताया। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव वैध राजनीतिक बहस की सीमाओं को लांघकर आतंकवाद को वैधता देता है।
इसके बाद रविवार देर रात इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पहले कदम के तौर पर जैक पोलान्स्की के इजराइल में प्रवेश पर आधिकारिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। यह फैसला इसलिए भी विरोधाभासी माना जा रहा है क्योंकि यहूदी मूल के पोलान्स्की ने उस मतदान में भाग ही नहीं लिया था।
यहूदी सदस्यों की स्थिति और अपुष्ट दावों की पड़ताल
प्रस्ताव के बाद यह दावा भी सामने आया कि अब ग्रीन पार्टी में यहूदी सदस्यों के लिए स्थान नहीं बचेगा, किंतु पार्टी ने इस दावे का खंडन किया है। ग्रीन पार्टी की प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि पार्टी सभी प्रकार के नस्लवाद के विरोध के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी यहूदी सदस्य को ऐसे सिनेगॉग (यहूदी उपासनागृह) में जाने के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाएगा जो खुद को जायोनिस्ट मानता हो।
फिर भी, ब्रिटिश यहूदी संगठनों की चिंताएं ठोस आंकड़ों पर टिकी हैं। ‘इंस्टीट्यूट फॉर ज्यूइश पॉलिसी रिसर्च’ के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन के लगभग दो-तिहाई यहूदी खुद को जायोनिस्ट मानते हैं। ‘प्रोग्रेसिव ज्यूडाइज्म’ ने इस प्रस्ताव को यहूदियों के खिलाफ नफरत बढ़ाने वाला बताया है, वहीं कंजर्वेटिव पार्टी के शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलिप ने ग्रीन पार्टी को “मूल रूप से विषाक्त” करार देते हुए कहा कि ब्रिटिश यहूदियों को किसी पार्टी में स्वीकार किए जाने के लिए यहूदी आत्मनिर्णय के अधिकार को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
ग्रीन पार्टी का यह फैसला ब्रिटेन की राजनीति में इजराइल-फलस्तीन मुद्दे पर गहराते वैचारिक विभाजन को रेखांकित करता है। जहां प्रस्ताव के समर्थक इसे किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा और उत्पीड़न के विरोध के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं पार्टी के अपने सांसदों की असहमति ने इसके भीतर ‘दो ग्रीन पार्टियों’ के अस्तित्व की बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में होल्बॉर्न उपचुनाव के नतीजे यह स्पष्ट करेंगे कि ब्रिटिश मतदाता पार्टी के इस आधिकारिक एंटी-जायोनिस्ट रुख पर क्या फैसला सुनाते हैं।
इस सम्मेलन के दौरान पार्टी के भीतर चले वैचारिक मतभेदों और बहस को समझने के लिए ग्रीन पार्टी सम्मेलन में जायोनिज्म प्रस्ताव पर छिड़ी आंतरिक बहस का यह वीडियो देखा जा सकता है, जो ब्राइटन में हुए इस पूरे घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं को सीधे तौर पर दर्शाता है।

